अगली नस्लें तो न भटकें!

मैं तो इस ख़ाना-बदोशी में भी ख़ुश हूँ लेकिन,
अगली नस्लें तो न भटकें उन्हें घर भी देना|

मेराज फ़ैज़ाबादी

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