सरकती जाए है !

अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, अमीर मीनाई जी की लिखी यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है-

सरकती जाए है रुख से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता।

आशा है आपको यह पसंद आएगी,
धन्यवाद।

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