अपना ग़म ले के कहीं

अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं निदा फाज़ली साहब की लिखी एक ग़ज़ल अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे चंदन दास जी ने गाया था-

अपना ग़म ले के कहीं और न जाया जाए,

घर की बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाए।



आशा है आपको यह पसंद आएगी,
धन्यवाद ।
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