आज मैंअपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से एक कवि श्री सबरस जी के कुछ ‘दुमदार दोहे’ जो मैंने बहुत पहले कवि सम्मेलन में सुने थे, (मुझे उनका पूरा नाम भी याद नहीं है) जैसे ये हास्य के दोहे मुझे याद हैं, मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ, मेरा उद्देश्य केवल उनकी इस रचना को जनता तक पहुंचाना ही है-
आशा है आपको ये पसंद आएंगे
धन्यवाद ।
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