कोई मेरे दिल से पूछे!

कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को,
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।

मिर्ज़ा ग़ालिब

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