कल फिर सुबह नई होगी!

आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी का यह नवगीत – दिन को ही हो गई रात-सी, लगता कालजयी होगीकविता बोली- “मत उदास हो, … Continue reading कल फिर सुबह नई होगी!