एक शब के टुकड़ों के!

एक शब के टुकड़ों के नाम मुख़्तलिफ़ रखे,
जिस्म-ओ-रूह का बंधन सिलसिला है ख़्वाबों का|

कृष्ण बिहारी नूर

Leave a comment