अपनी अपनी ताबीरें!

अपनी अपनी ताबीरें ढूँढता है हर चेहरा,
चेहरा चेहरा पढ़ लीजे तज़्किरा है ख़्वाबों का|

कृष्ण बिहारी नूर

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