देश से जब परदेस!

देश से जब परदेस सिधारे हम पर ये भी वक़्त पड़ा,
नज़्में छोड़ी ग़ज़लें छोड़ी गीतों का बेवपार किया|

जाँ निसार अख़्तर

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