एक ख़ामोश क़यामत!

दिल में वो शोरिश-ए-जज़्बात कहाँ तेरे बग़ैर,
एक ख़ामोश क़यामत के सिवा कुछ भी नहीं|

जाँ निसार अख़्तर

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