अपने ज़ख़्म दिखा लूँ!

किसे है ख़्वाहिश-ए-मरहम-गरी मगर फिर भी,
मैं अपने ज़ख़्म दिखा लूँ अगर इजाज़त हो|

जौन एलिया

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