हुस्न ओ इश्क़ की!

हुस्न ओ इश्क़ की लाग में अक्सर छेड़ उधर से होती है,
शम्अ’ का शो’ला जब लहराया उड़ के चला परवाना भी|

आरज़ू लखनवी

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