अव्वल-ए-शब वो बज़्म की रौनक़ शम्अ’ भी थी परवाना भी,
रात के आख़िर होते होते ख़त्म था ये अफ़्साना भी|
आरज़ू लखनवी
A sky full of cotton beads like clouds
अव्वल-ए-शब वो बज़्म की रौनक़ शम्अ’ भी थी परवाना भी,
रात के आख़िर होते होते ख़त्म था ये अफ़्साना भी|
आरज़ू लखनवी
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