प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा-

निर्मल मन लेकर आए हो
सोच रहे हो खुश रह लोगे!
इस जग का व्यवहार अलग है
यहाँ नहीं मन किसी काम का,
दाम यहाँ केवल चलता है
कुछ न मोल है यहाँ साम का,
झूठों का अंबार कचहरी देखेगी
तुम क्या कह लोगे।
रात वेदना की जब छाए,
बांध गांठ में चंदा रखना
वरना खो जाएगा निशि में
हर मंसूबा, हर एक सपना,
काजल सी काली यह दुनिया
कितना इसको तुम सह लोगे।
यह दुनिया एक जादू टोना
मायावी संभालते इसको
इसने कितनों को भरमाया
कैसे साध सकोगे इसको,
बहुत बड़ी यह भूल-भुलैया
आस किरण को भी तरसोगे।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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