ग़ुंचे चुप हैं गुल हैं हवा!

ग़ुंचे चुप हैं गुल हैं हवा पर किस से कहिए जी का हाल,
ख़ाक-नशीं इक सब्ज़ा है सो अपना भी बेगाना भी|

आरज़ू लखनवी

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