जब बंद हुईं आँखें तो!

जब बंद हुईं आँखें तो खुला दो रोज़ का था सारा झगड़ा,

तख़्त उस का न अब है ताज उस का अस्कंदर ओ दारा कोई नहीं|

आरज़ू लखनवी

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