उस आँख से पर्दा!

गुल-गश्त में दामन मुँह पे न लो नर्गिस से हया क्या है तुम को,
उस आँख से पर्दा करते हो जिस आँख में पर्दा कोई नहीं|

आरज़ू लखनवी

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