आराम के थे साथी!

आराम के थे साथी क्या क्या जब वक़्त पड़ा तो कोई नहीं,
सब दोस्त हैं अपने मतलब के दुनिया में किसी का कोई नहीं|

आरज़ू लखनवी

2 responses to “आराम के थे साथी!”

  1. बहुत सही।

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    1. जी बिल्कुल

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