तुझ पे मरता हूँ तिरे!

तुझ पे मरता हूँ तिरे सर की क़सम खाता हूँ,
ग़ैर ने आज ठिकाने की क़सम खाई है|

मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

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