कहाँ की गर्द हवा!

सब अपने शनासा छोड़ गए रस्ते में हमें ग़ैरों की तरह,
चेहरे पे हमारे डाल गई ला कर ये कहाँ की गर्द हवा|

क़ैसर शमीम

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