पत्थर की हिफ़ाज़त में!

इक ज़ेहन-ए-परेशाँ में ख़्वाब-ए-ग़ज़लिस्ताँ है,
पत्थर की हिफ़ाज़त में शीशे की जवानी है|

बशीर बद्र

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