आँसू कभी शीशा है!

ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल,
आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है|

बशीर बद्र

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