नज़र वो साफ़ अब !

तिरी तस्वीर जो टूटे हुए दिल का सहारा थी,
नज़र वो साफ़ अब आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ|

अनवर मिर्ज़ापुरी

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