जिसे अपना समझता था वो आँख अब अपनी दुश्मन है,
कि ये रोने से बाज़ आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ|
अनवर मिर्ज़ापुरी
A sky full of cotton beads like clouds
जिसे अपना समझता था वो आँख अब अपनी दुश्मन है,
कि ये रोने से बाज़ आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ|
अनवर मिर्ज़ापुरी
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