हँसने में जो आँसू !

हँसने में जो आँसू आते हैं नैरंग-ए-जहाँ बतलाते हैं,
हर रोज़ जनाज़े जाते हैं हर रोज़ बरातें होती हैं|

आरज़ू लखनवी

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