अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय कुंवर बेचैन जी का यह श्रेष्ठ नवगीत शेयर कर रहा हूँ-
आंखों में सिर्फ बादल, सुनसान बिजलियां हैं
अंगार हैं अधर पर, सब सांस आंधियां हैं
रग-रग में तैरती सी इक आग की नदी है,
ये बीसवीं सदी है!
आशा है आपको यह पसंद आएगा,
धन्यवाद।
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