दुनिया-ए-फ़िराक़ में!

उम्मीद का सूरज डूबा है आँखों में अंधेरा छाया है,
दुनिया-ए-फ़िराक़ में दिन कैसा रातें ही रातें होती हैं|

आरज़ू लखनवी

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