क़हर की रातें होती हैं!

जिन रातों में नींद उड़ जाती है क्या क़हर की रातें होती हैं,
दरवाज़ों से टकरा जाते हैं दीवारों से बातें होती हैं|

आरज़ू लखनवी

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