दीवारों से मिलकर रोना!

अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में क़ैसर उल ज़ाफरी जी की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे पंकज उधास जी ने गाया था-

दीवारों से मिलकर रोना अच्छा लगता है,
हम भी पागल हो जाएंगे, ऐसा लगता है।

प्रस्तुत है यह वीडिओ-


आशा है आपको यह पसंद आएगा
धन्यवाद।

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