फ़ितरत-ए-इंसाँ को!

जुरअत-ए-इंसाँ पे गो तादीब के पहरे रहे,
फ़ितरत-ए-इंसाँ को कब ज़ंजीर पहनाई गई|

साहिर लुधियानवी

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