कोहराम से पहले!

कोई कैसे करे दिल में छुपे तूफ़ाँ का अंदाज़ा,
सुकूत-ए-मर्ग* छाया है किसी कोहराम से पहले|
*सन्नाटा
क़तील शिफ़ाई

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