इक मौज दबे पाँव तआ’क़ुब में* चली आई,
हम ख़ुश थे बहुत रेत की दीवार बना कर|
*पीछे से
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds
इक मौज दबे पाँव तआ’क़ुब में* चली आई,
हम ख़ुश थे बहुत रेत की दीवार बना कर|
*पीछे से
क़तील शिफ़ाई
Leave a comment