अच्छे अच्छे टूट जाते!

मिरी औक़ात ही क्या है मैं इक नन्हा सा आँसू हूँ,
बुलंदी से तो गिर कर अच्छे अच्छे टूट जाते हैं|

वसीम नादिर

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