फूल में रंगत भी थी!

फूल में रंगत भी थी ख़ुशबू भी थी और हुस्न भी,
उस ने आवाज़ें तो दीं लेकिन कहाँ मैं सुन सका|

कृष्ण बिहारी नूर

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