सैकड़ों मोती हैं!

ज़माना में नहीं अहल-ए-हुनर का क़द्र-दाँ बाक़ी,
नहीं तो सैकड़ों मोती हैं इस दरिया के दामन में|

चकबस्त बृज नारायण

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