न बतलाई किसी ने!

न बतलाई किसी ने भी हक़ीक़त राज़-ए-हस्ती की,
बुतों से जा के सर फोड़ा बहुत दैर-ए-बरहमन में|

चकबस्त बृज नारायण

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