नई तहज़ीब के झगड़े!

पुरानी काविशें दैर-ओ-हरम की मिटती जाती है,
नई तहज़ीब के झगड़े हैं अब शैख़-ओ-बरहमन में|

चकबस्त बृज नारायण

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