हवा-ए-ताज़ा दिल को ख़ुद-बख़ुद बेचैन करती है,
क़फ़स में कह गया कोई बहार आई है गुलशन में|
चकबस्त बृज नारायण
A sky full of cotton beads like clouds
हवा-ए-ताज़ा दिल को ख़ुद-बख़ुद बेचैन करती है,
क़फ़स में कह गया कोई बहार आई है गुलशन में|
चकबस्त बृज नारायण
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