बहाना कर के तन्हा!

मुझे ऐ नाख़ुदा आख़िर किसी को मुँह दिखाना है,
बहाना कर के तन्हा पार उतर जाना नहीं आता|

यगाना चंगेज़ी

2 responses to “बहाना कर के तन्हा!”

Leave a comment