मिट सकते हैं धोने से|!

बाद-अज़-वक़्त पशीमाँ हो कर ज़ख़्म नहीं भर सकते तुम,
दामन के धब्बे अलबत्ता मिट सकते हैं धोने से|

मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

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