इंसाँ इंसाँ बनेगा कब!

वही है वहशत, वही है नफ़रत आख़िर इस का क्या है सबब,
इंसाँ इंसाँ बहुत रटा है इंसाँ इंसाँ बनेगा कब|

अली सरदार जाफ़री

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