आरिज़ पे लहराते रहे!

जिस क़दर बढ़ता गया ज़ालिम हवाओं का ख़रोश,
उस के काकुल* और भी आरिज़ पे लहराते रहे|
*ज़ुल्फ की लट
अली सरदार जाफ़री

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