रुतों की सर्द हवा!

आँखों की चमक मौहूम हुई लौ देते बदन अफ़्सुर्दा हुए,
दर आई है ‘क़ैसर’ घर में मिरे ये कैसी रुतों की सर्द हवा|

क़ैसर शमीम

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