क्या बात हुई क्यूँ!

क्या बात हुई क्यूँ शहर जला अब इस के सिवा कुछ याद नहीं,
इक फ़र्द सरापा आग हुआ पल-भर में हुआ इक फ़र्द हवा|

क़ैसर शमीम

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