आज प्रस्तुत है एक गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा-

बातें दिल की कौन सुनेगा
है यह बौद्धिक जन की बस्ती!
दिल की बातें करने वाले
लुटते जाते, पिटते जाते
बहुधा अपमानित होकर भी
रहते गीत प्रेम के गाते,
छोडो ये झंझट अतीत के
सीखो नई प्रक्रिया सस्ती।
यहाँ बुद्धि व्यवहार चलेगा
भावुकता को दूर भगाओ
जो गाने दुनिया गाती है
तुम भी ताल मिलाकर गाओ,
सबके जैसा बनकर ही तुम
बचा सकोगे अपनी हस्ती।
भाव अलग व्यवहार अलग है
यह पूरा संसार अलग है,
किस दुनिया में रहते हो तुम
पूरा कारोबार अलग है,
नदी नई है जिसमें हो अब
इसमें ही खेनी है कश्ती।
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार ।
********
Leave a comment