ये भी तो सज़ा है!

ये भी तो सज़ा है कि गिरफ़्तार-ए-वफ़ा हूँ
क्यूँ लोग मोहब्बत की सज़ा ढूँढ रहे हैं।

सुदर्शन फ़ाकिर

Leave a comment