पत्थर के ही इंसाँ पाये!

पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाये हैं,
तुम शहरे-मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आये हैं।

सुदर्शन फ़ाकिर

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