दुनिया की तमन्ना थी!

दुनिया की तमन्ना थी कभी हम को भी ‘फ़ाकिर’,
अब ज़ख़्म-ए-तमन्ना की दवा ढूँढ रहे हैं।

सुदर्शन फ़ाकिर

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