क़िस्मत जागे तो हम!

क़िस्मत जागे तो हम सोएँ क़िस्मत सोए तो हम जागें,
दोनों ही को नींद आए जिस में कब ऐसी रातें होती हैं|

आरज़ू लखनवी

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