मीर-ए-कारवाँ मैं हूँ!

गर्द-ए-राह की सूरत साँस साँस है ऐ ‘नूर’,
मीर-ए-कारवाँ मैं हूँ क़ाफ़िला है ख़्वाबों का|

कृष्ण बिहारी नूर

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